इडिपस और नियति का खेल

16-सितम्बर-11, 07:00 रात्रि,

जवाहर कला केंद्र, जयपुर

नाटक : इडिपस

निर्देशन : एस. पी. रंगा

जोधपुर

नाटक इडिपस हजारों वर्षों पहले सोफोक्लीज द्वारा रचित ग्रीक नाटक “इडिपस टाईरेनोस” जो लेटिन में “इडिपस रेक्स” के नाम से भी जाना जाता है, का उर्दू अनुवाद है. नाटक का उर्दू अनुवाद जे. एन. कौशल ने किया है तथा परिकल्पना एवं निर्देशन एस.पी. रंगा ने किया है.

इस नाटक का त्रासद स्वयं नायक इडिपस है, जो नियति के हाथों बार बार छला जाता है. इडिपस का सम्पूर्ण जीवन केवल होनी के लिखे ही नहीं है, बल्कि उसके व्यक्तित्व में समाये कुछ विकार यथा उतावलापन, तुनकमिजाजी, घमंडी स्वभाव, हेकड़ी रखना आदि भी है, जो उसके पतन का कारण बनते है.

नियति पूरे नाटक में मुख्य रूप से खेलती है – चाहे वो लायस द्वारा या फिर स्वयं इडिपस द्वारा भविष्यवाणी को झुठलाये जाने के प्रयास से उत्पन्न स्थितियों व उनके परिणामों का दृश्यांकन हो. हालांकि इडिपस काफी समझदार नायक के रूप में उभर का सामने आता है, जो अपने बुद्धिमत्ता से थीब शहर को जादूगरनी के कहर से बचाता है, लेकिन स्वयं के जीवन के घटनाओं और परिस्थितियों का सही आकलन न कर पाने की वजह से एक पहेली बन कर रह जाता है. थीब के लोगों में उच्च सम्मानित व्यक्ति के ऊँचें ओहदे से जिलाव जैसे पतन की पड़ताल है ये नाटक.

एक बात और जो इस नाटक में परिलक्षित होती है, वह है बाह्य चक्षुओं से प्राप्त ज्ञान और प्रज्ञा चक्षुओं से जाना सत्य. इस तथ्य का दृश्यांकन इडिपस और टाइरेसियास की बातचीत में सामने आता है. प्रज्ञा चक्षुओं से जाना सत्य ही अंतिम सत्य साबित होता है. जो इडिपस अपने ज्ञान व बुद्धि कौशल से बल पर जादूगरनी की पहेली को बूझ कर थीब शहर की रक्षा करता है, वही अपने जीवन के चक्रव्यूह में उलझ जाता है.

भारतीय सन्दर्भ में भी यह मान्यता है कि व्यक्ति के अनचाहे कर्मों का फल उसे भुगतना ही पड़ता है. नियति को आप चाहे कितना भी नकारने की कोशिश कर लें, पर होता वही है नियति ने निश्चित कर रखा है. पूरे नाटक में नियति का यही वर्चस्व दृष्टिगोचर होता है.

1 comment for “इडिपस और नियति का खेल

  1. Jeetendra Singh
    March 6, 2017 at 9:53 am

    इस नाटक का प्रकाशक और उसका फोन नम्बर दे ताकि यह पढा़ जा सके और अपनी राय भी दे सकू पढ़कर

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