Tag: भिखारी ठाकुर

‘रंगमंच में कम होती जा रही है अभिनेता की भूमिका’ – सतीश आनंद

सतीश आनंद पिछले चार दशकों से हिंदी रंगमंच में एक महत्वपूर्ण और केंद्रीय व्यक्तित्व के तौर पर उपस्थित हैं। उन्होंने नब्बे से भी अधिक नाटकों का निर्देशन किया और लगभग डेढ़ सौ नाटकों में प्रमुख भूमिका निभाई है। ‘बिदेसिया’ के…

… केकरा से करीं अरजिया हो सगरे बेईमान!

भिखारी ठाकुर के एक साथी की दास्तान ‘‘हंसी-हंसी पनवा खिअइले बेइमनवा कि अपने विदेशवा बसेले हो राम.’’ किसी जमाने में मशहूर भोजपुरी नाटक बिदेसिया के विरह-वेदना भरे इस गाने को सुन निगाहें बरबस ही उस वृद्ध भिखमंगे की तरफ ठहर जाती…

भोजपुरी लोकरंग के वैश्विक कलाकार : भिखारी ठाकुर

“अबहीं नाम भईल बा थोरा । जब यह छूट जाई तन मोरा ।। तेकरा बाद पच्चास बरीसा । तेकरा बाद बीस दस तीसा ।। तेकरा बाद नाम हो जईहन । पंडित कवि सज्जन जस गईहन ।। (१) आज हम उनकर…

भिखारी ठाकुर : एक परिचय

बात उन्नीसवीं सदी की है. इसी सदी में एक अहम् अध्याय का उदय होता है .भारतीय समाज में अधिकांश पिछड़ी जतियो में से एक अत्यंत पिछड़ी जाती के नाई समाज से एवं  बिहार के सारण जिले में अवस्थित  कुतुबपुर गाँव…

’’भिखारी ठाकुर की सामाजिक चेतना’’

नई दिल्ली ! लोक कलाकार एवं रंगकर्मी भिखारी ठाकुर की सामाजिक चेतना विषय पर राष्टीय सेमिनार का आयोजन २४ जुलाई को दिल्ली के राजेंद्र भवन (आइटीओं) में आयोजित किया जा रहा है. भिखारी ठाकुर ने  भोजपुरी जनजीवन को बहुत प्रभावित…

एक सार्वकालिक रंग-बयान : भिखारी ठाकुर

एक सार्वकालिक रंग-बयान : भिखारी ठाकुर लेखक : Ak Pankaj 1987 में नाट्य पत्रिका ‘बिदेसिया’ की शुरुआत तथा रांची में भिखारी ठाकुर जन्म शताब्दी समारोह के आयोजन के सिलसिले में मैं पहली बार दियारा गया था। भोजपुरी के शेक्सपीयर का…