Tag: रंगवार्ता

बिहार रंगमंच में बाबाओं का अवतार और ‘किरपा’ की बारिश

पटना में रंग आन्दोलन चल रहा है …क्या ये मुद्दे भी उस पृष्ठभूमि में हैं ? अश्विनी कुमार पंकज का लेख साभार मोहल्ला लाइव से ले के यहाँ शेयर किया जा रहा है !  – एडिटर   बिहार की रंग…

रंगवार्ता : दलित-आदिवासी रंगमंच विशेषांक

रंगवार्ता : दलित-आदिवासी रंगमंच विशेषांक मार्च 2012 के लिए रचनाएं आमंत्रित हैं. आप रंगवार्ता के लिए लिख सकते हैं – 1. भारतीय रंगमंच पर दलित दस्तक 2. भारतीय रंगमंच में आदिवासी अभिव्यक्ति 3. भारत के दलित-आदिवासी नाटककार एवं रंगकर्मी 4.…

सलाम एवं हार्दिक शुभकामनाएं!

कल से शुरू हो रहे इप्टा के राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल सभी प्रतिनिधियों को ‘रंगवार्ता’ की ओर से सलाम एवं हार्दिक शुभकामनाएं! उपनिवेशवादी संस्कृति के खिलाफ संघर्षरत साथियों को हूल जोहार. सम्मेलन सफल हो और भारतीय जनता के संघर्ष की…

‘रंगवार्ता’ का ‘रंगमंच पर स्त्री छवियां’

‘रंगवार्ता’ का नया अंक उपलब्ध है ‘रंगमंच पर स्त्री छवियां विशेषांक’ नवंबर 2011 – जनवरी 2012 इस अंक में आप पढ़ेंगे देश-दुनिया के स्त्री रंगमंच को हिंदी में पहली बार. 80 पृष्ठों का संग्रहणीय दस्तावेजी अंक. रंग-नेपथ्य 4. लहू है…

‘रंगमंच पर स्त्री छवियां’

यह रंगवार्ता के अगले अंक का कवर पेज है. आप सबको मालूम ही है रंगवार्ता का आगामी अंक ‘रंगमंच पर स्त्री छवियां’ विशेषांक है. हम कवर पेज के चयन में आपका सहयोग चाहते हैं. कृपया बताएं कि उपरोक्त तीनों में…

‘रंगवार्ता’ रंगमंच की त्रैमासिक पत्रिका

रंगवार्ता एक सामूहिक प्रयास है. इसे 2004-2005 में अश्विनी पंकज और सचिन ने शुरू किया था. फेसबुक पर ‘द स्टेज’ रंगसमूह के साथियो से हुई उत्साहजनक बातचीत के बाद अब फिर से यह एक नये रंग-रूप में और नये सहयोगियों…

… केकरा से करीं अरजिया हो सगरे बेईमान!

भिखारी ठाकुर के एक साथी की दास्तान ‘‘हंसी-हंसी पनवा खिअइले बेइमनवा कि अपने विदेशवा बसेले हो राम.’’ किसी जमाने में मशहूर भोजपुरी नाटक बिदेसिया के विरह-वेदना भरे इस गाने को सुन निगाहें बरबस ही उस वृद्ध भिखमंगे की तरफ ठहर जाती…

नाट्य विभाग राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर और ‘द परफॉर्मर्स’ उदयपुर

नाटक में गीत और संगीत का संगीत का पुट रवींद्र नाथ टैगोर की खासियत रही है। गीत की लय में जब नाटक चलता है तो उसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है। शायद यही कारण है कि टैगोर की कई विधाओं…

Jammu Diary

बुजुर्गो की मनोदशा को दर्शा गया ‘और दिन ढल गया’ जम्मू,1 जुलाई :  ग्रूव आ‌र्ट्स ने शशि भूषण के लिखे हिन्दी नाटक ‘और दिन ढल गया’ का मंचन किया।परफारमिंग आर्ट स्टूडियो, कच्ची छावनी में आयोजित नाट्य समारोह ‘सात दिन हमारे’…

जनभाषा रंगभाषा बने यही हमारे समय की चुनौती है : ‘रंगवार्ता’ लोकार्पण

जनभाषा रंगभाषा बने यही हमारे समय की चुनौती है स्थानीय दारोगा प्रसाद राय स्मृति भवन, पटना में आज त्रैमासिक पत्रिका ‘रंगवार्ता’ का लोकार्पण वरिष्ठ नाटककार रवींद्र भारती ने किया। इस मौके पर उनके साथ फिल्मकार गिरीश रंजन, जावेद अख्तर, हसन…